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मंत्रिपरिषद विस्तार के माध्यम से नीतीश कुमार ने बीजेपी को यह संदेश देने की कोशिश की, पढ़े पूरी रिपोर्ट

दिल्ली

30 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित 50 से अधिक मंत्रियों ने शपथ ग्रहण की। मोदी सरकार भाग-2 के इस शपथ ग्रहण समारोह में नीतीश कुमार की जनता दल युनाइटेड की नाममात्र की भागीदारी रही। मोदी सरकार के मंत्री परिषद में मांग के अनुरूप भागीदारी नहीं मिलने से नाराज नीतीश कुमार ने बिहार में अपने मंत्रिमंडल का विस्तार कर भारतीय जनता पार्टी को करारा जवाब दिया है।



नीतीश कुमार ने मंत्रिपरिषद का विस्तार करते हुए 8 नए मंत्रियों को शपथ दिलाई, इनमें से घटक दल भाजपा का एक भी सदस्य नहीं था। नीतीश कुमार के मंत्रिपरिषद विस्तार ने देश में एक नई राजनीतिक चर्चा को जन्म दे दिया है। राजनीतिक पंडितों की माने तो नीतीश कुमार ने मंत्रिपरिषद विस्तार के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी को अपनी ताकत का एहसास कराया है। इस विस्तार के माध्यम से नीतीश कुमार ने भाजपा को यह संदेश देने की कोशिश की है कि उनकी पार्टी जनता दल यूनाइटेड किसी की अनुकंपा पर नहीं चल रही है।

नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड के लोकसभा चुनाव में 16 सांसद निर्वाचित हुए हैं। वहीं जदयू के 6 सदस्य राज्यसभा में भी हैं। इन सब के बावजूद मोदी सरकार में जदयू से सिर्फ एक सांसद को सांकेतिक रूप से मंत्रिपरिषद में जगह दी गई है। मोदी सरकार के गठन के बाद नीतीश कुमार बीजेपी से असंतुष्ट बताए जा रहे हैं, हालांकि मीडिया के सामने नीतीश कुमार ने ऐसी कोई बात अभी तक नहीं कही है।

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