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मुख्यमंत्री अशोक गहलोत दिल्ली में सियासी फील्डिंग सेट करने में लगे हुए हैं,

दिल्ली

राजस्थान में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी की एकतरफा हार के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के तारे-सितारे कुछ ठीक नहीं चल रहे हैं। पार्टी के अंदर से ही कई नेता मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की कार्यशैली को इस बड़ी हार के लिए जिम्मेदार बता रहे हैं। पार्टी के अंदर मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठने लगी हैं।



सुबे के डिप्टी सीएम सचिन पायलट भी अपने धड़े को मजबूत करने में लगे हुए हैं। पायलट समर्थक कई नेता तो खुलकर मीडिया के सामने मुख्यमंत्री गहलोत पर टिप्पणी कर चुके हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी अपने पक्ष में माहौल तैयार करने के लिए लगातार दिल्ली के नेताओं के संपर्क में हैं। गहलोत को राजनीति का जादूगर कहा जाता है, उनका तख्तापलट करना हर किसी के बस की बात नहीं है। गहलोत दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व का फिर से विश्वास जीतने में लगे हुए हैं।

मुख्यमंत्री गहलोत ने रविवार को हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा व पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा से मुलाकात की। इस मुलाकात में राजस्थान में लोकसभा चुनाव में हार के बाद उत्पन्न हुई परिस्थितियों पर विस्तार से चर्चा की गई। पार्टी में उत्पन्न हो रही बगावत से निपटने को लेकर भी मंथन किया गया। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री गहलोत सोमवार को राहुल गांधी से मिलने का प्रयास भी करेंगे।

राहुल गांधी 10 जून को केरल दौरा समाप्त कर दिल्ली पहुंचेंगे, वही गहलोत राहुल गांधी की अनुपस्थिति में निरंतर दिल्ली में पार्टी के अन्य नेताओं से मिल रहे हैं। इसे एक बड़ा सियासी दांव पेच माना जा रहा है। राहुल गांधी ने चुनाव परिणाम में हार के बाद गहलोत पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि कई नेताओं के पुत्र मोह ने पार्टी को नुकसान पहुंचाया है। राहुल गांधी के इस बयान के बाद गहलोत व राहुल गांधी की मुलाकात नहीं हुई है। सोमवार को गहलोत ने राहुल गांधी से मिलने के लिए समय मांगा है। 

जहां अशोक गहलोत दिल्ली में रह कर अपने पक्ष में फील्डिंग सेट करने में लगे हुए हैं, वही सूबे के डिप्टी सीएम सचिन पायलट जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे हैं। पायलट रविवार को दलितों व आदिवासियों के बीच जालौर दौरे पर रहे।

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